खान-पान के कुछ सरल नियम जिन्हें हमेशा याद रखना चाहिए


खान-पान के कुछ सरल नियम जिन्हें हमेशा याद रखना चाहिए

ध्यान दें!Eating
‘भोजन के एक ग्रास को चौबीस बार चबाना चाहिए।’ इसके पीछे काफ़ी वैज्ञानिक आधार है, मगर मुख्य रूप से उसका एक फ़ायदा यह है कि आपका भोजन पहले ही आपके मुंह में लगभग पच जाता है, वह पाचन-पूर्व स्थिति में पहुंच जाता है और आपके शरीर में सुस्ती नहीं पैदा करता।

इसके अलावा, उस खाने को भी धन्यवाद देना चाहिए, क्योंकि यह आपको जीवन दे रहा है। देखने में भले ही यह छोटी सी बात लग रही है लेकिन यह आप पर आपके शरीर की पकड़ को ढीला कर देती है।दूसरी चीज यह है कि अगर आप चौबीस बार चबाएंगे, तो उस भोजन की सूचना आपके शरीर में स्थापित हो जाती है और आपके शरीर की हर कोशिका यह तय कर सकती है कि आपके लिए क्या सही है और क्या सही नहीं है – स्वाद के अर्थ में नहीं बल्कि इस संबंध में कि पूरे शरीर के लिए क्या उचित है। अगर आप कुछ समय तक यह चीज करें, तो शरीर की हर कोशिका को यह पता होगा कि उसे क्या पसंद है और क्या पसंद नहीं है।

कितनी बार खाएं
आपको दिन भर खाते नहीं रहना चाहिए। अगर आपकी उम्र तीस साल से कम है, तो दिन में तीन बार खाना आपके लिए फिट होगा। अगर आप तीस से अधिक के हैं, तो दिन में दो बार कहना सबसे अच्छा है। हमारा शरीर और दिमाग बेहतरीन रूप में तभी काम करता है, जब पेट खाली हो। चेतन रहते हुए इस तरीके से खाएं कि ढाई घंटों के भीतर, भोजन पेट की थैली से बाहर हो जाए और बारह से अठारह घंटों में, वह पूरी तरह शरीर के बाहर हो। अगर आप यह सरल जागरुकता कायम रखें, तो आप ज्यादा ऊर्जा, फुर्ती और सजगता महसूस करेंगे।

भोजन के दौरान कभी भी पानी नहीं पीना चाहिए। भोजन से तीस मिनट पहले थोड़ा सा पानी पिएं या भोजन करने के तीस से चालीस मिनट बाद पानी पिएं।

सही समय के लिए सही आहार चुनें

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भारत में मौसम या ऋतुनुसार वनस्पति का चुनाव करें. और शरीर के लिए क्या उचित है, इसके मुताबिक गर्मियों में भोजन एक तरीके से, बरसात में दूसरे तरीके से और सर्दियों में अलग तरीके से बनाया जाता है। इस समझदारी को अपने जीवन में शामिल करना और शरीर की जरूरत तथा मौसम और जलवायु के अनुसार खाना कहना चाहिए।
उदाहरण के लिए, दिसंबर आते ही तिल और गेहूं जेसे कुछ खाद्य पदार्थ होते हैं जो शरीर में गरमी लाते हैं। सर्दियों में आम तौर पर जलवायु के ठंडा होने के कारण त्वचा खुरदरी हो जाती है। पहले लोग क्रीम या लोशन जैसी चीजों का इस्तेमाल नहीं करते थे। इसलिए हर कोई रोजाना तिल का सेवन करता था। तिल शरीर को गरम और त्वचा को साफ रखता है। अगर शरीर में काफी गरमी होगी, तो आपकी त्वचा खराब नहीं होगी। गरमियों में, शरीर गरम हो जाता है, इसलिए शरीर को ठंडक देने वाली चीजें खाई जाती थीं।

संतुलित आहार लें

डॉक्टरों का कहना है कि भारत मधुमेह रोगियों का देश है ये सच भी जान पड़ता है क्योंकि 8 करोड़ भारतीय मधुमेह की बीमारी से ग्रसित हैं। इसकी एक वजह यह है कि ज्यादातर भारतीयों के आहार में एक ही अनाज शामिल होता है। लोग सिर्फ चावल या सिर्फ गेहूं खा रहे हैं। यह निश्चित तौर पर बीमारियों की वजह बन सकता है। अपने आहार में अलग-अलग अनाजों को शामिल करना बहुत अहम है।
पहले लोग हमेशा ढेर सारे चने, दालें, फलियां और दूसरी चीजें खाते थे। लेकिन धीरे-धीरे वे चीजें खत्म होती गईं और आज अगर आप किसी दक्षिण भारतीय की थाली देखें, तो उसमें काफी सारा चावल और थोड़ी सी सब्जी होगी। यह एक गंभीर समस्या है। पिछले पच्चीस से तीस सालों में लोग सिर्फ कार्बोहाइड्रेट आहार की ओर मुड़ गए हैं, जिसे बदलने की जरूरत है। सिर्फ ढेर सारा कार्बोहाइड्रेट लेने और बाकी चीजें कम मात्रा में खाने से किसी व्यक्ति की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। लोगों के दिमाग में यह बुनियादी वैचारिक बदलाव होना बहुत जरूरी है। आहार का अधिकांश हिस्सा चावल नहीं, बल्कि बाकी चीजें होनी चाहिए।

भोजन के बीच हमेशा अंतराल रखें

योग में कहा गया है कि एक भोजन कर लेने के बाद आपको आठ घंटे बाद ही दूसरा भोजन करना चाहिए। खाने के इस नियम का पालन आप तब भी कर सकते हैं, जब आप घर से बाहर हों। ये तो बात हुई योग के नियम की, लेकिन सामान्य स्थिति में भी किसी इंसान को दो भोजनों के बीच कम से कम 5 घंटे का अंतर तो रखना ही चाहिए। ऐसा क्यों कहा जा रहा है? इसलिए क्योंकि खाली पेट ही हमारा मल उत्सर्जन तंत्र अच्छे तरीके से काम कर पाता है।

खाने से पहले जरा ठहरें

बहुत ज्यादा भूखे हो तो ज्यादा कहना न खाएं और खाना और कहना जल्दी-2 ना खाये।

खाना शुरू करने से पहले हर उस शख्स और चीज के प्रति आभार व्यक्त करें, जिसकी बदौलत यह खाना आप तक पहुंचा है। मसलन वह खेत, वह किसान, वह व्यक्ति जिसने खाना बनाया और वह भी जिसने इसे आपको परोसा।
खाने का सबसे बेहतरीन तरीका शरीर से पूछकर खाना है। क्योंकि हमारा शरीर ही है जो हमे सटीक सलाह देता है कि भोजन में क्या खाएं और क्या न खाएं।

इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि उचित खान-पान के ये सामान्य नुस्खे ज्यादातर लोगों पर लागू होते हैं मगर निश्चित तौर पर, हर किसी के शरीर की संरचना अनूठी होती है और किसी खास बीमारी से पीडि़त लोगों को आहार या भोजन की मात्रा में कोई बदलाव करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

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