मोदी ने अपनी नाकामी से सब का ध्यान हटाने के लिए तीन तलाक का मुद्दा उठाया: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

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Muslims personal low board blemish Modi

Muslims personal low board blemish Modi,दिल्ली:- तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम पर्सनल

लॉ बोर्ड ने सरकार के रवैये पर बहुत एतराज जताया है।

बोर्ड से जुड़े हजरत मौलाना वली रहमानी ने गुरुवार को कहा- ‘हम यूनिफॉर्म सिविल कोड का बायकॉट करेंगे।

ये सोच मुल्क को तोड़ने वाली, गैरवाजिब और नामुनासिब है।’

रहमानी ने यह भी कहा, ‘मोदी ने ढाई साल की अपनी नाकामी और असल मुद्दों से

लोगों का ध्यान भटकाने के लिए लिए ये शोशा छोड़ा है। हम इसका विरोध करेंगे।’ बता

दें कि पिछले हफ्ते शुक्रवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर तीन

तलाक और बहु विवाह को खत्म करने के लिए यूनिफॉर्म सिविल लॉ की वकालत की थी।

बोर्ड ने और क्या कहा…
– बोर्ड की तरफ से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया- ‘भारत की आजादी के आंदोलन में मुस्लिम

बराबरी से शरीक हुए लेकिन बंटवारे के बाद उनको हमेशा कमतर आंका गया।’
– ‘कानून में एक समझौते के तहत मुस्लिम इस देश में रह रहे हैं। कानून हमें हमारे

धर्म को मानने की इजाजत देता है।’
– रहमानी ने कहा- ‘अमेरिका में हर किसी को अपना कानून मानने और पहचान बनाए रखने की इजाजत है,

भारत इस मामले में उसे क्यों नहीं फॉलो करता?’
– ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड भारत के लिए सही नहीं है। मोदी सरकार बांटने की रणनीति पर काम कर रही है।

देश में कई कल्चर हैं, उनका आदर किया जाना चाहिए।’
– ‘मुसलमान अपने धार्मिक नियम-कायदों से संतुष्ट हैं। यहां तक कि हर कम्युनिटी अपने धार्मिक

नियमों के साथ जीवन बिताना चाहती है।’
– इस बीच, एआईएमआईएम चीफ और बोर्ड के मेंबर असदुद्दीन ओवैसी ने भी कहा है कि, ‘धर्म के मामले में सरकार

को दखल नहीं देना चाहिए, यूनिफॉर्म सिविल कोड हिंदुस्तान के लिए अच्छा नहीं है।’
केंद्र ने हलफनामे में क्या कहा है?
– तीन तलाक पर सरकार की तरफ से हलफनामा मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस की एडिशनल सेक्रेट्री

मुकुलिता विजयवर्गीय ने दायर किया है।
– सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा है- ‘भारत में जारी तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु विवाह का इस्लाम में रिवाज नहीं है।

तीन बार तलाक कहना महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है।

सच तो ये है कि कई मुस्लिम देशों में इस बारे में बड़े सुधार किए जा चुके हैं।’
– देश की कॉन्स्टिट्यूशनल हिस्ट्री में पहली बार सरकार ने महिला-पुरुष में बराबरी और सेकुलरिज्म

के आधार पर इन पर फिर से विचार करने की अपील की है।
– हलफनामे में तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु विवाह की वैधता का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है

कि लैंगिक भेदभाव खत्म करने, गरिमा और समानता के सिद्धांत के आधार पर इन पर विचार किया जाना चाहिए।

ये ऐसी चीजें हैं जिनसे समझौता नहीं किया जा सकता।
– सरकार की तरफ से ये भी कहा गया है कि भारत में महिलाओं को उनके कानूनी अधिकार

देने से इनकार नहीं किया जा सकता।इन मुस्लिम देशों के कानूनों का किया जिक्र
– हलफनामे में केंद्र सरकार कहा है- ‘मुस्लिम देशों में इसमें पहले ही बदलाव किया जा चुका है।’
– केंद्र ने ईरान, इजिप्ट, इंडोनेशिया, तुर्की, ट्यूनीशिया, मोरक्को, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और

पाकिस्तान में निकाह कानून में हुए बदलाव का एग्जाम्पल दिया है।
– साथ ही कहा है- ‘तीन तलाक के मुताबिक, हसबेंड अपनी बीवी को तीन बार तलाक

बोलकर ही तलाक दे देता है। निकाल हलाल के मुताबिक, तलाकशुदा कपल तब तक शादी नहीं कर सकते,

जब तक कि महिला दोबारा शादी करने के बाद तलाक लेकर या फिर सेकेंड

हसबेंड की मौत होने के बाद सिंगल नहीं हो जाती।’सरकार ने क्यों दायर किया हलफनामा?
– शायरा बानो समेत कई लोगों की तरफ से दायर पिटीशन में मुस्लिमों में जारी इन प्रथाओं

की वैधता को चुनौती दी गई थी।- मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इन पिटीशन को खारिज करने की मांग की थी।

कहा था-‘इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए।’- जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा था।

पिछले दिनों केंद्र ने जवाब देने के लिए कोर्ट से 4 हफ्तों का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मान लिया था।

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