पहाड़ों पर मोटर साइकिल की सवारी में है रोमांच ही रोमांच

the same thrill from riding motorcycles on mountains

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same thrill from riding motorcycles on mountains,चेहरे से टकराती पसीने की बुँदे,

बालों को टकराती तेज हवा, कही तेज चढ़ाई, कही तीखी ढलान, टेडी मेडी सड़क,

खतरनाक मोड़, हर तरफ हरियाली, इसी के साथ पौधों की सुगंध भी मन मोहने में सक्षम है।

ये वो आकर्षण है जिन्हें देख लोग बार-बार पहाड़ों की ओर मोटरसाइकिलें लेकर निकल पड़ते हैं।

मोटर साइकिल की सवारी में वैसे तो रोमांच ही रोमांच है, परंतु पहाड़ों पर  बाइक चलाने का मजा ही कुछ और होता है।

यह और बात है कि जिस कार्य में  जितना अधिक रोमांच होता है,

वहा खतरे भी  उतने ही ज्यादा होते हैं।

आजकल मोटर साइकिल अपनी गुणवत्ता के चलते बेहद विश्वसनीय होने लगी है।

बाजार में हर व्यक्ति की जरूरत के अनुरूप बाइके हैं।

आज 100 सीसी से लेकर 350 सीसी तक मोटर साइकिलें उपलब्ध हैं और विशेष प्रकार की

मोटर साइकिलें विदेश से मंगाना भी कठिन काम नहीं। पहाड़ों पर ले जाने के लिय  मोटर साइकिल

शक्तिशाली व पूर्ण संतुलन वाली होनी चाहिए, भले ही उसकी स्पीड  ज्यादा न हो।

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संतुलन है जरूरी

ऐसी यात्रा से पूर्व कुछ तैयारियां भी करनी भी आवश्यक होती हैं, जिससे विपरीत  हालात उत्पन होने

पर उनसे आसानी से निबटा जा सके। पहाड़ की यात्रा में संतुलन  बेहद जरूरी होता है।

ऐसी मोटर साइकिलें जिसका वजन आगे-पीछे से 60:40 के अनुपात में हो, बेहतर है।

मोटर साइकिलें के टायर की चौड़ाई वाहन के रोड ग्रिप (सड़क पर पकड़) को तय करती है।

बेहतर रोड ग्रिप के लिए चौड़ा टायर उपयुक्त होता है। मोटर साइकिलें का टूपिन अधिक ताकतवर होना आवयश्क  नहीं,

लेकिन उससे शक्ति कम आरपीएम पर मिल सके तब ठीक होता है।

ऐसी बाइक पहाड़ों पर अधिक उपयुक्त होती है, जिसके दूसरे व तीसरे गियर में पर्याप्त शक्ति हो,

जबकि उन्हें बार-बार चेंज करने की जरूरत न पड़े।

आप जब रोमांचक यात्रा पर हों तो ईधन खपत खास महत्व नहीं रखता,

पर दूर पहाड़ी क्षेत्र में कम ईधन वाली खपत बाइक आपको चिंतामुक्त रखेगी।

सर्विसिंग करा लें।

आप जो मोटर साइकिल ले जाना चाह रहे है उसकी सर्विसिंग जरूर करा लें, भले ही वह सही चल रही  हो।

पहाड़ी रास्ते आमतौर पर बारिश या भूस्खलन के चलते खराब होते रहते हैं।

प्राय: मोटरसाइकिल के नट-वोल्ट की सही से जांच कर लें। मोटर साइकिल में सबसे बड़ी परेशानी पंक्चर की होती है।

इसकी व्यवस्था बेहद जरूरी है।

आपको छोटी-मोटी गड़बड़ीया ठीक करना, पहिया निकलना, टयूब बदलना, पंक्चर बनाना आना चाहिए।

वैसे अब पहाड़ों में लोगों की आवाजाही के चलते जगह-जगह पंक्चर सही करने वाले भी मिलने लगे हैं,

लेकिन बीच राह में आप ही अपने मददगार होंगे। यात्रा के दौरान अपनी मोटर साइकिल

को प्रतिदिन सुबह टायरों में हवा, सभी नट-वोल्ट, इंजन ऑयल चलाने से पहले जांचना चाहिए।

सामान बांधते समय भी मोटर साइकिल के संतुलन का ध्यान रखना आवयश्क है।

स्पेयर्स में प्लग, ब्रेक वायर, स्टार्टिग क्वायल, क्लच वायर, पंचर किट, ब्रेकलीवर, फुट पंप,

हेडलाइट बल्ब, क्लच ,चेन लिंक तथा रबर पाइप और स्पेयर टयब्स आदि  आवयश्क रखें।

टूल्स में भी टायर ओपनर लीवर्स, प्लग ओपनर, फोल्डिंग हैमर, स्क्रू ड्राइवर, रिंच, प्लास,

स्टार्टिग क्वायल खोलने लगाने के औजार, वाल्व ओपनर, एक छोटी शक्तिशाली टॉर्च भी रखें ले।

 

सामान कम रखें

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मोटर साइकिल यात्रा के दोरान सामान कम से कम होना चाहिए। लेकिन जैकेट, विंडचीटर,

जींस, मौसम के अनुसार जूते, मोटे मोजे,  मफलर, चश्मा, बैग्स, हैवरसैक वाटर बॉटल जरूर रखें।

सामान को बांधने के लिए सूती रस्सी का प्रयोग  ही करें और उसे पॉलीथिन से ढक ले।

 

लगातार न चलें

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पहाड़ों पर मोटर साइकिल  से कभी भी लगातार लंबी दूरी तय न करें।

बीच-बीच में रुकना साइटसीइंग के साथ थकान से बचने हेतु भी जरूरी हैं। पहाड़ पर मोटर साइकिल

कभी भी तेज गति से बाइक नहीं चलानी चाहिए। अंधेरा हो जाने पर पहाड़ों पर नहीं चलना  चाहिए।

यात्रा में दूरी के हिसाब से पहले से योजना बना लेनी चाहिए। इसी के साथ ठहरने के स्थान का भी ध्यान रखना चाहिए।

क्षेत्र की जानकारी जरूरी

यात्रा पर निकलने से पहले आप जहा जा रहे हो उस क्षेत्र की जानकारी रखना भी जरुरी है।

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